आत्मन एवानुसवनमञ्जसाव्यतिरेकेण बोभूयमानाशेषपुरुषार्थस्वरूपस्य किन्तु नाथाशिष आशासानानामेतदभिसंराधनमात्रं भवितुमर्हति ॥ ८ ॥
अनुवाद
आप में हर क्षण जीवन के सभी लक्ष्य और ऐश्वर्यों में स्वतः ही, लगातार और असीमित वृद्धि हो रही है। वास्तव में, आप स्वयं ही अनंत सुख और आनंद हैं। हे भगवान, हम हमेशा भौतिक सुखों के चक्कर में रहते हैं। आपको इन सभी बलिदानों की आवश्यकता नहीं है, लेकिन ये हमारे लिए हैं ताकि आप हमें आशीर्वाद दें। ये सभी बलिदान हमारे स्वार्थ के लिए किए जाते हैं, और वास्तव में आपको इनकी आवश्यकता नहीं है।
All the goals and opulences of life are increasing in You every moment, spontaneously, continuously and infinitely. In fact, You Yourself are filled with infinite happiness and bliss. O Lord, we are always caught up in material pleasures. You do not need all these yajna ceremonies. They are for us to receive Your blessings. All these yajnas are performed for our own karma-phala and in reality You do not need them at all.
तात्पर्य
आत्मनिर्भर होने के कारण परमेश्वर को विशाल बलिदान की आवश्यकता नहीं होती है। अधिक ऐश्वर्यपूर्ण जीवन के लिए फलदायी गतिविधि उन लोगों के लिए है जो अपनी रुचि के लिए ऐसी भौतिक संपन्नता की इच्छा रखते हैं। यज्ञार्थत्कर्मणोंन्यत्र लोकोयंकर्म-बन्धनः: यदि हम परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए कार्य नहीं करते हैं, तो हम माया की गतिविधियों में संलग्न हो जाते हैं। हम एक भव्य मंदिर का निर्माण कर सकते हैं और हजारों डॉलर खर्च कर सकते हैं, लेकिन ऐसा मंदिर भगवान को आवश्यक नहीं है। भगवान के पास उनके निवास के लिए लाखों मंदिर हैं, और उन्हें हमारे प्रयास की आवश्यकता नहीं है। उन्हें किसी भी प्रकार की संपन्न गतिविधि की आवश्यकता नहीं है। ऐसा जुड़ाव हमारे लाभ के लिए है। यदि हम अपने धन को एक भव्य मंदिर के निर्माण में लगाते हैं, तो हम अपने प्रयासों की प्रतिक्रियाओं से मुक्त हो जाते हैं। यह हमारे लाभ के लिए है। इसके अलावा, यदि हम परमेश्वर के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास करते हैं, तो वे हमसे प्रसन्न होते हैं और हमें अपना आशीर्वाद देते हैं। अंत में, भव्य व्यवस्था भगवान की खातिर नहीं बल्कि हमारी अपनी खातिर है। यदि हम किसी तरह से भगवान से आशीर्वाद और लाभ प्राप्त करते हैं, तो हमारी चेतना पवित्र हो सकती है और हम परमधाम में वापस, घर लौटने के पात्र बन सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥