श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 3: राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से ऋषभदेव का जन्म  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.3.19 
श्रीशुक उवाच
इति निशामयन्त्या मेरुदेव्या: पतिमभिधायान्तर्दधे भगवान् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
श्रीशुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा कि यह कहकर भगवान अदृश्य हो गए। राजा नाभि की पत्नी महारानी मेरुदेवी अपने पति के पास ही बैठी हुई थीं, परिणामस्वरूप परमेश्वर ने जो कुछ कहा था, उसे वे सुन रही थीं।
 
Sri Sukadeva Goswami further said—After saying this, the Lord disappeared. King Nabhi's wife Merudevi was sitting next to her husband, and as a result she was listening to whatever the Supreme Lord was saying.
तात्पर्य
वैदिक निर्देशों के अनुसार, व्यक्ति को अपनी पत्नी के साथ मिलकर यज्ञ करना चाहिए। शपनीको धर्मम आचरत: : धार्मिक अनुष्ठानों को अपनी पत्नी के साथ मिलकर किया जाए; इसलिए महाराज नाभि ने अपनी महान बलि को अपनी पत्नी के साथ मिलकर किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)