तत आग्नीध्रीयेंऽशकलयावतरिष्याम्यात्मतुल्यमनुपलभमान: ॥ १८ ॥
अनुवाद
जबसे मैंने स्वयं के समान कोई नहीं पाया, मैं स्वयं ही आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ में अवतार लूँगा।
Since I am not able to find anyone equal to myself, I myself will incarnate in a partial form from the womb of Merudevi, the wife of Maharaja Nabhi, son of Agnidhra.
तात्पर्य
यह भगवान की सर्वव्यापकता का एक उदाहरण है। यद्यपि वह द्वितीय रहित हैं, वे स्वामंश, अपने व्यक्तिगत विस्तार और कभी-कभी विविधांश, या अपने अलग विस्तार से स्वयं का विस्तार करते हैं। भगवान विष्णु यहाँ मेरुदेवी के पुत्र के रूप में अपने व्यक्तिगत विस्तार को भेजने के लिए सहमत हैं, जो महाराज नाभि की पत्नी हैं, जो अग्निध्र के पुत्र हैं। ऋत्विज, पुजारियों को पता था कि भगवान एक हैं, फिर भी उन्होंने सर्वोच्च भगवान से महाराज नाभि के पुत्र बनने की प्रार्थना की ताकि दुनिया को पता चले कि परम सत्य, भगवान एक है द्वितीय रहित। जब वे अवतार लेते हैं, तो वे खुद को विभिन्न शक्तियों में विस्तार देते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥