पुजारियों को वैकुण्ठ से सर्वोच्च भगवान को ऐसी तुच्छ वजह के लिए बुलाने से निश्चित रूप से अप्रसन्नता हुई थी। एक शुद्ध भक्त कभी भी भगवान को व्यर्थ में देखना नहीं चाहता। भगवान विभिन्न कार्यों में लगे रहते हैं, और शुद्ध भक्त उन्हें अपनी इंद्रियतृप्ति के लिए सनकीपन से नहीं देखना चाहता। शुद्ध भक्त केवल भगवान की कृपा पर निर्भर रहता है, और जब भगवान प्रसन्न होते हैं, तो वह उन्हें आमने-सामने देख सकता है। भगवान श्री ब्रह्मा और भगवान शिव जैसे देवताओं द्वारा भी नहीं देखे जाते। नभि महाराजा के पुरोहितों ने सर्वोच्च भगवान को बुलाकर खुद को अज्ञानी साबित कर दिया; फिर भी, भगवान अपनी अकारण दया से बाहर आए। इसलिए वे सभी भगवान से क्षमा पाना चाहते थे।
भौतिक लाभ के लिए सर्वोच्च भगवान की पूजा अधिकारियों द्वारा अनुमोदित नहीं है। जैसा कि भगवद्-गीता (7.16) में कहा गया है:
चतुर्-विधा भजन्ते माम
जना: सुकृतिनो अ्र्जुन
आर्तो जिज्ञासुर अर्थार्थी
ज्ञान च भरतर्षभ
"हे भरतों में श्रेष्ठ [अर्जुन], चार प्रकार के पवित्र पुरुष मुझमें भक्ति सेवा प्रदान करते हैं - संकटग्रस्त, धन का इच्छुक, जिज्ञासु और वह जो निरपेक्ष की खोज में है।"
भक्ति में दीक्षा तब शुरू होती है जब व्यक्ति संकट की स्थिति में होता है या धन की आवश्यकता होती है, या जब व्यक्ति निरपेक्ष सत्य को समझने के लिए जिज्ञासु होता है। फिर भी, जो लोग इस तरह से सर्वोच्च भगवान के पास आते हैं, वे वास्तव में भक्त नहीं हैं। निरपेक्ष सत्य, भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के बारे में पूछताछ करने के कारण उन्हें पवित्र (सुकृतिनः) के रूप में स्वीकार किया जाता है। भगवान की विभिन्न गतिविधियों और व्यस्तताओं को न जानते हुए, ऐसे लोग भौतिक लाभ के लिए भगवान को अनावश्यक रूप से परेशान करते हैं। हालाँकि, भगवान इतने दयालु हैं कि परेशान होने के बावजूद, वह ऐसे भिखारियों की इच्छाओं को पूरा करते हैं। शुद्ध भक्त अन्याभिलाषिता-शुना है; उसकी पूजा के पीछे कोई उद्देश्य नहीं होता। वह कर्म या ज्ञान के रूप में माया के प्रभाव से संचालित नहीं होता है। शुद्ध भक्त व्यक्तिगत विचार के बिना भगवान के आदेश को निष्पादित करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। ऋत्विज़, बलिदान में पुरोहित, कर्म और भक्ति के बीच के अंतर को अच्छी तरह से जानते थे, और क्योंकि वे खुद को कर्म, फलदायी गतिविधि के प्रभाव में मानते थे, उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी। वे जानते थे कि भगवान को किसी छोटे कारण से आने के लिए आमंत्रित किया गया था।
