श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 3: राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से ऋषभदेव का जन्म  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.3.10 
अथायमेव वरो ह्यर्हत्तम यर्हि बर्हिषि राजर्षेर्वरदर्षभो भवान्निजपुरुषेक्षणविषय आसीत् ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
हे परम पूजनीय, आप समस्त वरदाताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं और राजर्षि नाभि की यज्ञशाला में आपका प्रकट होना हमें आशीर्वाद देने के लिए हुआ है। क्योंकि हमने आपको देखा है, इसलिए आपने हमें सबसे मूल्यवान आशीर्वाद दिया है।
 
O most revered one, you are the best of all bestowers of benedictions and you have appeared in the sacrificial altar of Rajarshi Nabhi to bless us. Since we have been able to see you, you have granted us the most valuable benediction.
तात्पर्य
नित्य-पुरुष-दर्शन-विषय। भगवद्गीता (9.29) में कृष्ण कहते हैं, समोऽहं सर्वभूतेषु: "मैं किसी से ईर्ष्या नहीं करता और न ही मैं किसी का पक्षपाती हूँ। मैं सभी के लिए समान हूँ। परंतु जो कोई भी मुझे भक्ति में सेवा देता है वह मेरा मित्र है, मुझ में है और मैं भी उसका मित्र हूँ।"

भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व सभी के समान हैं। उस अर्थ में, उनका कोई शत्रु नहीं है और कोई मित्र नहीं है। हर कोई अपने काम के फलदायी परिणामों का आनंद ले रहा है, और प्रभु, हर किसी के दिल में, देख रहे हैं और हर किसी को वांछित परिणाम दे रहे हैं। हालाँकि, जिस तरह भक्त हमेशा सर्वोच्च भगवान को हर तरह से संतुष्ट देखने के लिए उत्सुक रहते हैं, उसी तरह सर्वोच्च भगवान अपने भक्तों के सामने खुद को प्रस्तुत करने के लिए बहुत उत्सुक रहते हैं। श्री कृष्ण भगवद गीता (4.8) में कहते हैं:

परित्राणाय साधूनां

विनाशाय च दुष्कृताम्

धर्म-संस्थापनार्थाय

सम्भवामि युगे युगे

"पवित्रों को बचाने के लिए, दुष्टों का नाश करने के लिए और धर्म के सिद्धांतों को फिर से स्थापित करने के लिए, मैं स्वयं सहस्राब्दियों बाद सहस्राब्दियों में प्रकट होता हूं।"

इस प्रकार कृष्ण का प्रकट होना उनके भक्तों की मुक्ति और संतुष्टि के लिए हैं। वास्तव में वे स्वयं को राक्षसों को मारने के लिए प्रस्तुत नहीं करते, क्योंकि काम उनके एजेंटों द्वारा किया जा सकता है। महाराजा नाभि के यज्ञीय क्षेत्र में भगवान विष्णु का अवतार केवल राजा और उनके सहायकों को खुश करने के लिए था। अन्यथा उनके वहां उपस्थित होने का कोई कारण नहीं था।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)