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bhagavat 5.3.1: शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा- आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि को संतान की इच्छा हुई। इसलिए उन्होंने पूरे मन से उन भगवान विष्णु की स्तुति और आराधना शुरू की, जो सारे यज्ञों के उपभोक्ता और स्वामी हैं। उस समय तक महाराज नाभि की पत्नी मेरुदेवी की कोई औलाद नहीं हुई थी, अतः वह भी अपने पति के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने लगी।   |   bhagavat अध्याय 5.3: राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से ऋषभदेव का जन्म   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 3: राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से ऋषभदेव का जन्म  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.3.1 
श्रीशुक उवाच
नाभिरपत्यकामोऽप्रजया मेरुदेव्या भगवन्तं यज्ञपुरुषमवहितात्मायजत ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा- आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि को संतान की इच्छा हुई। इसलिए उन्होंने पूरे मन से उन भगवान विष्णु की स्तुति और आराधना शुरू की, जो सारे यज्ञों के उपभोक्ता और स्वामी हैं। उस समय तक महाराज नाभि की पत्नी मेरुदेवी की कोई औलाद नहीं हुई थी, अतः वह भी अपने पति के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने लगी।
 
Sukadeva Goswami further said—Maharaja Nabhi, son of Agnidhra, desired to have a child, so he started worshipping Lord Vishnu, the enjoyer and master of all sacrifices, with utmost devotion. Till that time Maharaja Nabhi's wife Merudevi had not given birth to any child, so she also started worshipping Lord Vishnu along with her husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)