एवम्प्रभावो भगवाननन्तो
दुरन्तवीर्योरुगुणानुभाव: ।
मूले रसाया: स्थित आत्मतन्त्रो
यो लीलया क्ष्मां स्थितये बिभर्ति ॥ १३ ॥
अनुवाद
उस पराक्रमी भगवान् अनन्तदेव के महान और गौरवशाली गुणों की कोई सीमा नहीं है। निश्चय ही उनकी शूरवीरता असीमित है। स्वयं आत्मनिर्भर होते हुए भी वे प्रत्येक वस्तु के आधार हैं। वे पाताल लोक में निवास करते हैं और पूरे ब्रह्मांड को आसानी से अपने ऊपर धारण करते हैं।
There is no limit to the great and glorious qualities of that powerful Lord Anantadeva. In fact, his valor is endless. Even though he is self-sufficient, he is the basis of everything. He lives in the netherworld and holds this entire universe.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥