ततोऽधस्तान्महातले काद्रवेयाणां सर्पाणां नैकशिरसां क्रोधवशो नाम गण: कुहकतक्षककालियसुषेणादिप्रधाना महाभोगवन्त: पतत्त्रिराजाधिपते: पुरुषवाहादनवरतमुद्विजमाना: स्वकलत्रापत्यसुहृत्कुटुम्बसङ्गेन क्वचित्प्रमत्ता विहरन्ति ॥ २९ ॥
अनुवाद
तलातल से नीचे का लोक महातल कहलाता है। यह सदैव क्रोधित रहने वाले बहु-फन वाले कद्रू के नाग-वंशजों का निवास स्थान है। इन नागों में कुहक, तक्षक, कालिय और सुषेण प्रमुख हैं। महातल के सभी नाग भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ के भय से सदैव आतंकित रहते हैं, लेकिन चिंता में डूबे होने के बावजूद उनमें से कुछ अपनी पत्नियों, संतानों, मित्रों और परिवार के सदस्यों के साथ-साथ खेलकूद करते रहते हैं।
The world below Talatal is called Mahatal. It is the abode of the snake progeny of Kadru who is always angry and has many hoods. The chief among these snakes are Kuhak, Takshak, Kaliya and Sushen. All the snakes of Mahatal are always terrified of Lord Vishnu's vehicle Garuda, but despite being worried, some of them keep playing with their wives, children, friends and family members.
तात्पर्य
यहाँ कहा गया है कि महतल नामक ग्रह-मंडल में रहने वाले सर्प बहुत शक्तिशाली होते हैं और जिनके कई फन होते हैं। वे अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ रहते हैं और खुद को बहुत खुश मानते हैं, हालाँकि वे हमेशा गरुड़ के कारण चिंता से भरे रहते हैं, जो उन्हें नष्ट करने के लिए वहाँ आता है। यही भौतिक जीवन का तरीका है। भले ही कोई सबसे घृणित स्थिति में रहता हो, फिर भी वह खुद को अपनी पत्नी, बच्चों, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ खुश समझता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥