अरे! स्वर्ग के राजा इंद्र कितने दयनीय हैं। उनके पास ज्ञान है, शक्ति है और एक बृहस्पति जैसे महामंत्री भी हैं, फिर भी वे अध्यात्म में कुछ भी नहीं समझते। बृहस्पति भी बुद्धिमान नहीं हैं, जिन्होंने अपने शिष्य इंद्र को ठीक से शिक्षा नहीं दी। भगवान वामनदेव इंद्र के द्वार पर आए थे, लेकिन इंद्र ने उनसे पारमार्थिक सेवा का अवसर नहीं माँगा, बल्कि उन्हें मेरे पास भिक्षा मांगने के लिए भेज दिया, ताकि उन्हें तीनों लोकों का राज मिल जाए और वे इंद्रिय-भोग में लिप्त रह सकें। तीनों लोकों का राज बहुत तुच्छ है, क्योंकि मनुष्य के पास चाहे कितना भी ऐश्वर्य क्यों न हो, वह एक मनु के काल तक ही रहता है, जो अनंत काल का एक छोटा सा अंश मात्र है।
Shame! How pitiable is Indra, the King of heaven, who, though very learned and powerful and having made Brihaspati his chief for consultation, is utterly ignorant of spiritual advancement. Brihaspati is also not wise, for he did not give his disciple Indra proper education. Lord Vamanadeva stood at Indra's door, but Indra, instead of asking him for an opportunity for transcendental service, sent him to my door to beg alms for the three worlds for his sense-enjoyment. The sovereignty of the three worlds is very insignificant, because no matter how much wealth a man may possess, it lasts only for one manvantara, which is a tiny fraction of eternity.
तात्पर्य
बली महाराज इतने शक्तिशाली थे कि उन्होंने इंद्र से लड़ाई करके तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। इंद्र निश्चित रूप से ज्ञान में बहुत उन्नत थे, लेकिन उन्होंने वामनदेव से उनकी सेवा में संलग्न होने के लिए नहीं कहा, बल्कि भगवान से भौतिक संपत्ति के लिए भीख मांगी जो कि मनु के एक युग के अंत में समाप्त हो जाएगी। मनु के एक युग, जो मनु के जीवन की अवधि है, की अवधि सत्तर-दो युगों के बराबर होती है। एक युग में 4,300,000 वर्ष होते हैं, और इसलिए मनु के जीवन की अवधि 309,600,000 वर्ष है। देवता मनु के जीवन के अंत तक ही अपने भौतिक वैभव को प्राप्त करते हैं। समय अविचल है। जीवन के लिए आवंटित किया गया समय, भले ही वह लाखों वर्षों का हो, जल्दी ही बीत जाता है। देवता अपनी भौतिक संपत्ति केवल समय की सीमा के भीतर ही रखते हैं। इसलिए बली महाराज ने दुःख व्यक्त किया कि यद्यपि इंद्र बहुत विद्वान थे, उन्हें यह नहीं पता था कि अपनी बुद्धि का सही उपयोग कैसे किया जाए, क्योंकि वामनदेव से उन्हें उनकी सेवा में संलग्न करने के लिए कहने के बजाय, इंद्र ने बली महाराज से भौतिक धन के लिए भीख माँगी। यद्यपि इंद्र विद्वान थे और उनके प्रधान मंत्री बृहस्पति भी विद्वान थे, लेकिन उनमें से किसी ने भी भगवान वामनदेव से प्रेममय सेवा करने में सक्षम होने के लिए भीख नहीं मांगी। इसलिए बली महाराज ने इंद्र के लिए विलाप किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥