यथा कांचनतां याति
कांस्यं रस-विधानातः
तथा दीक्षा-विधानेन
द्विजत्वं जायते नृणाम्
"जिस प्रकार कोई पारे के साथ उपचार करके कांस्य, या घंटी धातु, को सोने में बदल सकता है, उसी प्रकार कोई निम्न जन्म वाले व्यक्ति को वैष्णव गतिविधियों में उचित रूप से दीक्षा देकर ब्राह्मण बना सकता है।" इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस म्लेच्छों और यवनों को उचित रूप से दीक्षा देकर और उन्हें मांस खाने, नशे, अवैध सेक्स और जुए में शामिल होने से रोककर वास्तविक ब्राह्मण बनाने की कोशिश कर रहा है। जो इन चार पापपूर्ण गतिविधियों को रोकता है और हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करता है, वह निश्चित रूप से श्रील सनातन गोस्वामी द्वारा सुझाए गए वास्तविक दीक्षा की प्रक्रिया के माध्यम से एक शुद्ध ब्राह्मण बन सकता है।
इसके अलावा, यदि कोई इस छंद से संकेत लेता है और सीखता है कि घंटी धातु को उचित रूप से गर्म करके और पिघलाकर पारे के साथ कैसे मिलाया जाए, तो कोई बहुत सस्ते में सोना प्राप्त कर सकता है। मध्ययुगीन काल के कीमियागरों ने सोना बनाने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे, शायद इसलिए कि उन्होंने सही निर्देशों का पालन नहीं किया।
