Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.24.1: श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा - हे राजन, कुछ पुराण वाचकों का कहना है कि सूर्य से 10,000 (80,000 मील) योजन नीचे राहु नाम का ग्रह है जो नक्षत्रों की तरह घूमता है। इस ग्रह का स्वामी, जो सिंहिका का पुत्र है, सभी असुरों में घृणित है और इस पद के लिए पूरी तरह से अयोग्य होने के बावजूद इसे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से प्राप्त कर सका। मैं उसके बारे में आगे बताऊंगा। | bhagavat अध्याय 5.24: नीचे के स्वर्गीय लोकों का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
अधस्तात्सवितुर्योजनायुते स्वर्भानुर्नक्षत्रवच्चरतीत्येके योऽसावमरत्वं ग्रहत्वं चालभत भगवदनुकम्पया स्वयमसुरापसद: सैंहिकेयो ह्यतदर्हस्तस्य तात जन्म कर्माणि चोपरिष्टाद्वक्ष्याम: ॥ १ ॥
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा - हे राजन, कुछ पुराण वाचकों का कहना है कि सूर्य से 10,000 (80,000 मील) योजन नीचे राहु नाम का ग्रह है जो नक्षत्रों की तरह घूमता है। इस ग्रह का स्वामी, जो सिंहिका का पुत्र है, सभी असुरों में घृणित है और इस पद के लिए पूरी तरह से अयोग्य होने के बावजूद इसे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से प्राप्त कर सका। मैं उसके बारे में आगे बताऊंगा।
Sri Sukadeva Goswami said—O King, some Purana-readers say that 10,000 (80,000 miles) yojana below the Sun is a planet named Rahu which rotates like the stars. The presiding deity of this planet, who is the son of Sinhika, is hated by all the demons and despite being totally unfit for this position, he could get it by the grace of Sri Bhagavan. I will speak about him later.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥