श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 22: ग्रहों की कक्ष्याएँ  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.22.8 
एवं चन्द्रमा अर्कगभस्तिभ्य उपरिष्टाल्लक्षयोजनत उपलभ्यमानोऽर्कस्य संवत्सरभुक्तिं पक्षाभ्यां मासभुक्तिं सपादर्क्षाभ्यां दिनेनैव पक्षभुक्तिमग्रचारी द्रुततरगमनो भुङ्क्ते ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
सूर्य की किरणों के ऊपर १,००,००० योजन (८,००,००० मील) की दूरी पर चंद्रमा है जो सूर्य से अधिक गति से यात्रा करता है। वह दो चंद्र पक्षों में एक सौर संवत्सर के बराबर दूरी तय कर लेता है। इसका मतलब यह है कि ढाई दिन में सूर्य के एक महीने और एक दिन में सूर्य के एक पक्ष के बराबर दूरी तय कर लेता है।
 
The moon is 1,00,000 yojanas (8,00,000 miles) above the rays of sunlight and travels at a faster speed than the sun. It covers a distance equal to one solar year in two lunar fortnights. That is, it covers a distance equal to one month of the sun in two and a quarter days and a distance equal to one fortnight of the sun in one day.
तात्पर्य
जब हम ध्यान देते हैं कि चंद्रमा 100,000 योजन, या 800,000 मील, सूर्य की किरणों के ऊपर है, तो यह बहुत आश्चर्यजनक है कि चंद्रमा की आधुनिक यात्राएँ संभव हो सकती हैं। चूँकि चंद्रमा बहुत दूर है, तो अंतरिक्ष यान वहाँ कैसे जा सकते हैं यह एक संदिग्ध रहस्य है। आधुनिक वैज्ञानिक गणनाएँ एक के बाद एक परिवर्तन के अधीन हैं, और इसलिए वे अनिश्चित हैं। हमें वैदिक साहित्य की गणनाओं को स्वीकार करना होगा। ये वैदिक गणनाएँ स्थिर हैं, बहुत पहले की गई खगोलीय गणनाएँ और वैदिक साहित्य में दर्ज आज भी सही हैं। वैदिक गणनाएँ या आधुनिक गणनाएँ बेहतर हैं यह दूसरों के लिए एक रहस्य बना रह सकता है, लेकिन जहाँ तक हमारा सवाल है, हम वैदिक गणनाओं को सही मानते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)