अथ च यावन्नभोमण्डलं सह द्यावापृथिव्योर्मण्डलाभ्यां कार्त्स्न्येन स ह भुञ्जीत तं कालं संवत्सरं परिवत्सरमिडावत्सरमनुवत्सरं वत्सरमिति भानोर्मान्द्यशैघ्र्यसमगतिभि: समामनन्ति ॥ ७ ॥
अनुवाद
सूर्यदेव की तीन गतियाँ हैं - मंद, तीव्र और मध्यम। इन तीनों गतियों से स्वर्ग, पृथ्वी और अंतरिक्ष प्रक्षेत्रों के चारों ओर पूरी यात्रा करने में जितना समय लगता है उसे विद्वान संवत्सर, परिवत्सर, इडावत्सर, अनुवत्सर और वत्सर - इन पाँच नामों से पुकारते हैं।
The Sun has three types of movements-slow, fast and medium. The time taken by these three movements to complete the journey around heaven, earth and space regions is described by the learned people by these five names- Samvatsar, Parivatsar, Idavatsar, Anuvratsar and Vatsar.
तात्पर्य
सूर्य गणना के अनुसार प्रत्येक साल पाँच दिन कैलेण्डर साल से अधिक होता है और चन्द्र गणना के अनुसार प्रत्येक साल छ: दिन कम होता है। इसलिए, सूर्य तथा चन्द्र की गतियों की गिनती में बारह दिन का अन्तर आ जाता है। संवत्सर, परिवत्सर, इड़ावत्सर, अनुवत्सर और वत्सर के व्यतीत हो जाने पर प्रत्येक पाँच वर्षों में दो अतिरिक्त महीने बढ़ जाते हैं। इससे एक और संवत्सर अधिक हो जाता है, मगर क्योंकि वह संवत्सर अतिरिक्त है इसलिए सौर गणना उक्त पाँच नामों के अनुसार ही की जाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥