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bhagavat 5.22.6: इस प्रकार जितने समय में सूर्य आधे ब्रह्माण्ड की यात्रा पूरी करता है, उसे अयन या गति की अवधि [उत्तर या दक्षिण दिशा में] कहा जाता है।   |   bhagavat अध्याय 5.22: ग्रहों की कक्ष्याएँ   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 22: ग्रहों की कक्ष्याएँ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.22.6 
अथ च यावतार्धेन नभोवीथ्यां प्रचरति तं कालमयनमाचक्षते ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जितने समय में सूर्य आधे ब्रह्माण्ड की यात्रा पूरी करता है, उसे अयन या गति की अवधि [उत्तर या दक्षिण दिशा में] कहा जाता है।
 
Thus the time taken by the Sun to cross half the space is called ion [in north or south direction].
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)