ज्ञानानंदात्मनो विष्णुः
शिषुमार-वपुष्य था
ऊर्ध्व-लोकेषु स व्याप्त
आदित्याद्यास्तद-आश्रिता
"भगवान विष्णु, जो ज्ञान और परमानंद के स्रोत हैं, ने ब्रह्मांड के सबसे ऊपरी स्तर में स्थित सातवें आकाश में शिषुमार का रूप धारण किया है। सूर्य से शुरू होकर सभी ग्रह इस शिषुमार ग्रह प्रणाली के आश्रय में विद्यमान हैं।"
