यच्चक्षुरेष सवित सवित सकलग्रहाणाम्
राजससमस्त सुरमूर्तिरशेषतेजाः
यस्याज्ञया भ्रमति संभृतकालचक्रो
गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि
"मैं गोविन्द की उपासना करता हूँ, जो मूल प्रभु है जो ईश्वर का परम व्यक्तित्व है, जिसके नियंत्रण में सूर्य, जिसे ईश्वर की आँख माना जाता है, भी अनन्त काल की निश्चित कक्षा में घूमता है। सूर्य सभी ग्रह प्रणालियों का राजा है और जिसमे ऊष्मा और प्रकाश की असीम क्षमता है। " यद्यपि सूर्य को भागवत के रूप में वर्णित किया गया है, जो सबसे शक्तिशाली है, और यद्यपि यह वास्तव में ब्रह्मांड के भीतर सबसे शक्तिशाली ग्रह है, फिर भी उसे गोविंद, कृष्ण के आदेश का पालन करना पड़ता है। सूर्य-देव उस कक्षा से एक इंच भी नहीं हटा सकते जो उन्हें बनाई गई है। इसलिए, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में, भगवान के परम व्यक्तित्व का सर्वोच्च आदेश पूरा किया जाता है। सम्पूर्ण भौतिक प्रकृति उसके आदेशों का पालन करती है। हालाँकि, हम मूर्खतापूर्ण ढंग से भौतिक प्रकृति की गतिविधियों को बिना उनके पीछे के परम आदेश और परम व्यक्ति को समझे देखते हैं। जैसा कि भगवद-गीता में पुष्टि की गई है, मायाध्यक्षेण प्रकृति: भौतिक प्रकृति प्रभु के आदेशों को पूरा करती है, और इस प्रकार यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक चीज़ को क्रमबद्ध तरीके से बनाए रखा जाए।
