Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 5.21.2: जिस प्रकार गेहूँ के एक दाने को दो हिस्सों में विभाजित करने के बाद, निचले हिस्से के माप (आकार) को जानकर ऊपरी हिस्से का अनुमान लगाया जा सकता है, उसी प्रकार विशेषज्ञ भूगोलवेत्ताओं का कहना है कि इस ब्रह्माण्ड के ऊपरी हिस्से की माप को तभी समझा जा सकता है, जब निचले हिस्से की माप का पता हो। भूलोक और द्युलोक के बीच का आकाश अन्तरिक्ष कहलाता है। यह भूलोक के ऊपरी हिस्से और द्युलोक के निचले हिस्से को जोड़ता है।   |   bhagavat अध्याय 5.21: सूर्य की गतियों का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 21: सूर्य की गतियों का वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.21.2 
एतेन हि दिवो मण्डलमानं तद्विद उपदिशन्ति यथा द्विदलयोर्निष्पावादीनां ते अन्तरेणान्तरिक्षं तदुभयसन्धितम् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार गेहूँ के एक दाने को दो हिस्सों में विभाजित करने के बाद, निचले हिस्से के माप (आकार) को जानकर ऊपरी हिस्से का अनुमान लगाया जा सकता है, उसी प्रकार विशेषज्ञ भूगोलवेत्ताओं का कहना है कि इस ब्रह्माण्ड के ऊपरी हिस्से की माप को तभी समझा जा सकता है, जब निचले हिस्से की माप का पता हो। भूलोक और द्युलोक के बीच का आकाश अन्तरिक्ष कहलाता है। यह भूलोक के ऊपरी हिस्से और द्युलोक के निचले हिस्से को जोड़ता है।
 
Just as a grain of wheat is divided into parts and the upper part is determined by knowing the size of the lower part, similarly geographers say that the size of the upper part of this universe can be understood only when the size of the lower part is known. The space between Bhulok (earth) and Dulok (sky) is called space or outer-sky. It connects the top of Bhulok and the lower part of Dulok.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)