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bhagavat 5.21.17: अँगूठे के आकार के साठ हजार वालखिल्य नामक ऋषि सूर्यदेव के आगे रहते हैं और सुंदर स्तुतियाँ करते हुए उनकी पूजा करते हैं।   |   bhagavat अध्याय 5.21: सूर्य की गतियों का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.21.17 
तथा वालिखिल्या ऋषयोऽङ्गुष्ठपर्वमात्रा: षष्टिसहस्राणि पुरत: सूर्यं सूक्तवाकाय नियुक्ता: संस्तुवन्ति ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
अँगूठे के आकार के साठ हजार वालखिल्य नामक ऋषि सूर्यदेव के आगे रहते हैं और सुंदर स्तुतियाँ करते हुए उनकी पूजा करते हैं।
 
Sixty thousand thumb-sized sages called Valakhilyas stay in front of the Sun and chant his blessings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)