Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.21.13: सूर्यदेव के रथ में केवल एक पहिया है, जिसे संवत्सर के नाम से जाना जाता है। बारह महीनों को इसके बारह अरे माना जाता है, छह ऋतुएँ इसकी नेमियाँ (हाल) हैं, और तीन चार्तुमास इसकी तीन भागों में विभाजित आँवने (नाभि) हैं। पहिए को धारण करने वाले धुरे का एक सिरा सुमेरु पर्वत की चोटी पर और दूसरा सिरा मानसोत्तर पर्वत पर टिका हुआ है। धुरे के बाहरी सिरे पर लगा यह पहिया कोल्हू के चक्र की तरह लगातार मानसोत्तर पर्वत के चक्कर लगाता रहता है। | bhagavat अध्याय 5.21: सूर्य की गतियों का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूर्यदेव के रथ में केवल एक पहिया है, जिसे संवत्सर के नाम से जाना जाता है। बारह महीनों को इसके बारह अरे माना जाता है, छह ऋतुएँ इसकी नेमियाँ (हाल) हैं, और तीन चार्तुमास इसकी तीन भागों में विभाजित आँवने (नाभि) हैं। पहिए को धारण करने वाले धुरे का एक सिरा सुमेरु पर्वत की चोटी पर और दूसरा सिरा मानसोत्तर पर्वत पर टिका हुआ है। धुरे के बाहरी सिरे पर लगा यह पहिया कोल्हू के चक्र की तरह लगातार मानसोत्तर पर्वत के चक्कर लगाता रहता है।
There is only one wheel in the chariot of Sun God, which is called Samvatsara. It has twelve spokes in twelve months, six seasons, six rims (halves) and three navels divided into three parts in four months. One end of the axle holding the wheel rests on the peak of Sumeru mountain and the other end on Manasottar mountain. This wheel fitted on the outer end of the axle continuously revolves around Manasottar mountain like the wheel of a mill.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥