Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.20.6: हे महाराज, प्लक्षादि पाँचों द्वीपों में सभी प्राणियों में जन्म से ही आयु, बुद्धि, मानसिक बल, इंद्रियबल, शारीरिक बल और शौर्यता समान रूप से प्रकट होते हैं। | bhagavat अध्याय 5.20: ब्रह्माण्ड रचना का विश्लेषण । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्लक्षादिषु पञ्चसु पुरुषाणामायुरिन्द्रियमोज: सहो बलं बुद्धिर्विक्रम इति च सर्वेषामौत्पत्तिकी सिद्धिरविशेषेण वर्तते ॥ ६ ॥
अनुवाद
हे महाराज, प्लक्षादि पाँचों द्वीपों में सभी प्राणियों में जन्म से ही आयु, बुद्धि, मानसिक बल, इंद्रियबल, शारीरिक बल और शौर्यता समान रूप से प्रकट होते हैं।
O King, in the five islands like Plaksh etc., age, mental strength, sensory power, physical strength, intelligence and valour remain the same in all the residents right from their birth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥