सूर्यदेव को वैराज भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है समस्त जीवात्माओं के लिए सम्पूर्ण भौतिक शरीर। ब्रह्माण्ड के अण्डे के भीतर सृष्टि के समय प्रवेश करने के कारण उन्हें मार्तण्ड भी कहा जाता है। हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) से भौतिक शरीर प्राप्त करने के कारण उन्हें हिरण्यगर्भ भी कहा जाता है।
Suryadev is also called Vairaj i.e. the complete physical body for all living beings. He is also called Martanda because he entered the egg of the universe at the time of creation of the universe. He is also called Hiranyagarbha because he received the physical body from Hiranyagarbha (Brahma).
तात्पर्य
भगवान ब्रह्मा का स्थान अत्यंत उच्च, आध्यात्मिक रूप से उन्नत प्राणियों के लिए है। जब ऐसा कोई प्राणी अनुपलब्ध हो तो, भगवान विष्णु, भगवान का परम व्यक्तित्व, स्वयं भगवान ब्रह्मा के रूप में विस्तारित हो जाते हैं। ऐसा बहुत ही विरले ही होता है। फलस्वरूप, दो प्रकार के ब्रह्मा होते हैं। कभी-कभी ब्रह्मा एक साधारण प्राणी होते हैं, और कभी-कभी ब्रह्मा भगवान का परम व्यक्तित्व स्वयं होते हैं। यहां वर्णित ब्रह्मा एक साधारण प्राणी हैं। फिर चाहे ब्रह्मा भगवान का परम व्यक्तित्व हों या एक साधारण प्राणी, उन्हें वैराज ब्रह्मा और हिरण्यगर्भ ब्रह्मा के रूप में जाना जाता है। इसलिए सूर्य देव को भी वैराज ब्रह्मा के रूप में स्वीकार किया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥