श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 20: ब्रह्माण्ड रचना का विश्लेषण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.20.19 
योऽसौ गुहप्रहरणोन्मथितनितम्बकुञ्जोऽपि क्षीरोदेनासिच्यमानो भगवता वरुणेनाभिगुप्तो विभयो बभूव ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
कार्तिकेय के हथियारों से क्रौंच पर्वत की ढलानों पर उगने वाली वनस्पतियाँ भले ही नष्ट हो गई थीं, पर यह पर्वत निर्भीक हो गया है क्योंकि यह हमेशा चारों ओर से क्षीरसागर द्वारा सिंचित रहता है और वरुण देव द्वारा संरक्षित रहता है।
 
Though the vegetation on the slopes of Mount Krouncha was destroyed by Kartikeya's weapon attack, yet due to being always irrigated from all sides by the Kshirsagar and being protected by the god Varuna, this mountain has once again become fearless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)