Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.20.10: इन सातों विभागों में सात पर्वत हैं - स्वरस, शतशृंग, वामदेव, कुन्द, मुकुन्द, पुष्पवर्ष और सहस्रश्रुति। इनके साथ-साथ सात नदियाँ भी हैं - अनुमति, सिनीवाली, सरस्वती, कुहू, रजनी, नन्दा और राका। ये नदियाँ और पर्वत आज भी विद्यमान हैं। | bhagavat अध्याय 5.20: ब्रह्माण्ड रचना का विश्लेषण । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन सातों विभागों में सात पर्वत हैं - स्वरस, शतशृंग, वामदेव, कुन्द, मुकुन्द, पुष्पवर्ष और सहस्रश्रुति। इनके साथ-साथ सात नदियाँ भी हैं - अनुमति, सिनीवाली, सरस्वती, कुहू, रजनी, नन्दा और राका। ये नदियाँ और पर्वत आज भी विद्यमान हैं।
There are seven mountains in these seven divisions, whose names are Swaras, Shatashringa, Vamdev, Kund, Mukund, Pushpavarsha and Sahasrashruti. There are also seven rivers among them whose names are Aishma, Siniwali, Saraswati, Kuhu, Rajni, Nanda and Raka. These still exist today.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥