Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.2.9: पूर्वचित्ति के पीछे आ रहे भौरों को देखकर महाराज आग्नीध्र ने कहा—हे भगवान! प्रतीत होता है जैसे तुम्हारे शरीर को घेरे ये भौंरे अपने पूज्य गुरु को घेरे हुए शिष्य हों। वे तुम्हारी स्तुति में अनवरत रूप से सामवेद और उपनिषदों के मंत्रो का गान कर रहे हैं। जैसे ज्ञानी ऋषि वैदिक शास्त्रों की शाखाओं की ओर अपना ध्यान केंद्रित रखते हैं, वैसे ही ये भौंरे तुम्हारे बालों से झड़ते फूलों का रस ले रहे हैं। | bhagavat अध्याय 5.2: महाराज आग्नीध्र का चरित्र । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पूर्वचित्ति के पीछे आ रहे भौरों को देखकर महाराज आग्नीध्र ने कहा—हे भगवान! प्रतीत होता है जैसे तुम्हारे शरीर को घेरे ये भौंरे अपने पूज्य गुरु को घेरे हुए शिष्य हों। वे तुम्हारी स्तुति में अनवरत रूप से सामवेद और उपनिषदों के मंत्रो का गान कर रहे हैं। जैसे ज्ञानी ऋषि वैदिक शास्त्रों की शाखाओं की ओर अपना ध्यान केंद्रित रखते हैं, वैसे ही ये भौंरे तुम्हारे बालों से झड़ते फूलों का रस ले रहे हैं।
Seeing the bumble bees following the Purvachitti, Maharaja Agnidhra said—Lord, it appears as if these bumble bees surrounding your body are disciples surrounding their revered Guru. They are continuously singing the mantras of Samveda and Upanishads and thus praising you. Just as the sages follow the branches of the Vedic scriptures, these bumble bees are enjoying the flowers falling from your top.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥