श्री शुकदेव गोस्वामी आगे बोलते हैं- महाराज आग्नीध्र देवताओं के समान बुद्धिमान थे और उनके पास स्त्रियों को रिझाकर उन्हें अपने पक्ष में कर लेने की कला थी। अतः उन्होंने अपनी कामपूर्ण वाणी से उस स्वर्गकन्या की खुशामद की और उसे अपने पक्ष में कर लिया।
Srila Shukdev Goswami further said—Maharaj Agnidhra was as intelligent as the gods and was very skilled in the art of luring women to his side. So he pleased that heavenly maiden with his lustful words and won her over to his side.
तात्पर्य
चूँकि राजा आग्नीध्र एक भक्त थे, इसलिए वास्तव में भौतिक सुखों के प्रति उनका कोई आकर्षण नहीं था, परंतु वे चाहते थे कि उनकी पत्नी हो जिससे उन्हें संतान हो, और इस उद्देश्य से भगवान ब्रह्मा ने पूर्वचित्ति को भेजा था, इसलिए जानकारों जैसा व्यवहार करके उन्होंने चापलूसी भरी बातों से उन्हें प्रसन्न किया। स्त्रियाँ पुरुषों की चापलूसी भरी बातों से बहुत प्रभावित होती हैं। जो इस चापलूसी कला में निपुण होता है उसे विदग्ध कहते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥