रूपं तपोधन तपश्चरतां तपोघ्नंह्येतत्तु केन तपसा भवतोपलब्धम् ।
चर्तुं तपोऽर्हसि मया सह मित्र मह्यंकिं वा प्रसीदति स वै भवभावनो मे ॥ १५ ॥
अनुवाद
हे श्रेष्ठ तपस्वी, एक ऐसी सुन्दरता जिसके आगे दूसरों की तपस्या भी नतमस्तक हो जाती है, तुमने इसे कैसे प्राप्त किया? तुमने यह विद्या कहाँ से सीखी? हे मित्र, इस सुन्दरता को प्राप्त करने के लिए तुमने कौन-सा तप किया? मेरी इच्छा है कि तुम मेरे तप में शामिल हो जाओ, क्योंकि हो सकता है कि इस सृष्टि के ईश्वर ब्रह्मा, मुझ पर प्रसन्न होकर तुम्हें मेरी पत्नी बनाकर भेजा हो।
O best of ascetics, whence did you get this wonderful form which disturbs the penance of others? Where did you learn this art? O friend, what penance have you performed to acquire this beauty? I desire that you join me in penance, for it may be that Lord Brahma, the creator of this universe, being pleased with me, has sent you to be my wife.
तात्पर्य
आग्नीध्र ने पूर्वाचित्ति की अद्भुत सुंदरता की सराहना की। वास्तव में, वह इस असाधारण सुंदरता को देखकर हैरान रह गया था, जो पिछले तपस्याओं और तपस्याओं का परिणाम रहा होगा। इसलिए उसने लड़की से पूछा कि क्या उसने दूसरों की तपस्याओं और तपस्याओं को तोड़ने के लिए ऐसी सुंदरता प्राप्त की है। उसने सोचा कि ब्रह्मांड के निर्माता भगवान ब्रह्मा शायद उससे प्रसन्न हो गए हैं और इसलिए उसे उसकी पत्नी बनने के लिए भेज दिया होगा। उन्होंने पूर्वाचित्ति से उनकी पत्नी बनने का अनुरोध किया ताकि साथ में वे पारिवारिक जीवन में तपस्याएं और तपस्याएं कर सकें। दूसरे शब्दों में, एक उपयुक्त पत्नी अपने पति को घरेलू जीवन में तपस्या और तपस्या करने में मदद करती है यदि वे दोनों एक ही ऊंचे अध्यात्मिक समझ के मंच पर हों। आध्यात्मिक समझ के बिना पति-पत्नी समान रूप से स्थित नहीं हो सकते। ब्रह्मांड के निर्माता भगवान ब्रह्मा अच्छी संतान में रुचि रखते हैं। इसलिए जब तक वह प्रसन्न नहीं होता, कोई भी उपयुक्त पत्नी नहीं पा सकता। वास्तव में, विवाह समारोहों में भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है। भारत में आज भी, शादी के निमंत्रण कार्ड के चेहरे पर भगवान ब्रह्मा की तस्वीर के साथ ही जारी किए जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥