भारतेऽपि वर्षे भगवान्नरनारायणाख्य आकल्पान्तमुपचितधर्मज्ञानवैराग्यैश्वर्योपशमोपरमात्मोपलम्भनमनुग्रहायात्मवतामनुकम्पया तपोऽव्यक्तगतिश्चरति ॥ ९ ॥
अनुवाद
श्रीशुकदेव गोस्वामी ने कहा - श्री भगवान की महिमा का वर्णन करना असंभव है। उन्होंने अपने भक्तों पर कृपा करके, उन्हें धर्म, ज्ञान, त्याग, अध्यात्म, इंद्रिय-नियंत्रण और अहंकार से मुक्ति की शिक्षा देने के लिए भारतवर्ष की भूमि में बदरिकाश्रम नामक स्थान पर नर-नारायण के रूप में प्रकट हुए हैं। वे आत्म-साक्षात्कार की संपत्ति से परिपूर्ण हैं और कल्प के अंत तक तप में लीन रहेंगे। यही आत्म-साक्षात्कार की प्रक्रिया है।
Sri Shukdev Goswami further said—The glory of Sri Bhagwan is unimaginable. Out of his grace towards his devotees, he has manifested himself as Nar Narayan at a place called Badrikashram in the land of Bharatvarsh to impart them the teachings of religion, knowledge, sacrifice, spirituality, sense-control and freedom from ego. He is full of the wealth of self-knowledge and will remain engaged in meditation till the end of the Kalpa. This is the process of self-realization.
तात्पर्य
भारत में लोग बदरीकाश्रम में केवल नर-नारायण के मंदिर घूमने जा सकते हैं ताकि वे सीख सकें कि कैसे भगवान का परम व्यक्तित्व अपने अवतार नर-नारायण के रूप में लोगों को आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने का तरीका सिखाने के लिए तपस्या में व्यस्त रहते हैं। केवल अटकलों और भौतिक गतिविधियों में लिप्त होकर अपने आप को महसूस करना असंभव है। व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार और तपस्या के अभ्यास के बारे में बहुत गंभीर होना चाहिए। दुर्भाग्य से, कलियुग के लोगों को तपस्या के अर्थ का भी ज्ञान नहीं है। इन परिस्थितियों में, भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट हुए हैं ताकि गिर चुकी आत्माओं को आत्म-साक्षात्कार का सबसे आसान तरीका दिया जा सके, तकनीकी रूप से जिसे चेतो-दर्पण-मार्जनम कहा जाता है, जो किसी के हृदय के मूल से गंदगी को साफ करता है। यह विधि अत्यंत सरल है। कोई भी गौरवशाली कृष्ण-संकीर्तन - हरि कृष्ण, हरि कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरि हरि/ हरि राम, हरि राम, राम राम, हरि हरि का जाप कर सकता है। इस युग में तथाकथित उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान के विभिन्न रूप हैं, जैसे कि नृविज्ञान, मार्क्सवाद, फ्रायडियनवाद, राष्ट्रवाद और औद्योगिकवाद, लेकिन अगर हम नर-नारायण द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को अपनाने के बजाय उनके मार्गदर्शन में बहुत मेहनत करते हैं, तो हम अपने मूल्यवान मानव जीवन को व्यर्थ कर देंगे। इस प्रकार हम निश्चित रूप से ठगे और गुमराह होंगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥