इसलिए, चाहे कोई देवता हो या राक्षस, मनुष्य हो या मनुष्येतर प्राणी, जैसे कि जानवर या पक्षी, प्रत्येक को भगवान रामचंद्र की पूजा करनी चाहिए, जो इस पृथ्वी पर एक मानव की तरह अवतरित होते हैं। भगवान की पूजा के लिए किसी व्यापक तप या कष्ट की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि वह अपने भक्त की छोटी सेवा को भी स्वीकार करते हैं। इस तरह वह संतुष्ट हो जाते हैं, और जब वह संतुष्ट होते हैं, तो भक्त सफल हो जाता है। सच में, भगवान श्री रामचंद्र अयोध्या के सभी भक्तों को वैकुण्ठ धाम वापस ले गए।
Therefore, whether sura or asura, human being or non-human being like animals or birds, everyone should worship the Supreme Personality of Godhead Ramachandra who appears on this earth in human form. No severe penance or sadhana is required for worshiping the Lord, because He is willing to accept even the humblest service of His devotee. In this way He becomes pleased, and as soon as He is pleased, the devotee becomes successful. Indeed, Sri Ramachandra took all the devotees of Ayodhya back to Vaikuntha Dham.
तात्पर्य
भगवान श्री रामचन्द्र अपने भक्तों के प्रति इतने दयालु और कृपालु हैं कि वे किसी भी मानव या अन्य प्राणी द्वारा की गई थोड़ी सी सेवा से भी बहुत आसानी से संतुष्ट हो जाते हैं। भगवान रामचन्द्र की पूजा करने का यह विशेष लाभ है, और भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु की पूजा करने से भी यही लाभ मिलता है। भगवान कृष्ण और भगवान रामचंद्र, क्षत्रियों के तरीके से, कभी-कभी असुरों को मारकर अपनी दया दिखाते थे, लेकिन भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने असुरों को भी बिना किसी कठिनाई के भगवान का प्रेम प्रदान किया। भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व की सभी अवतार - लेकिन विशेष रूप से भगवान रामचंद्र, भगवान कृष्ण और बाद में भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु - ने उनके सामने मौजूद बहुत सी जीवित संस्थाओं को, वास्तव में उनमें से लगभग सभी को मुक्त कर दिया। इसलिए, श्री चैतन्य महाप्रभु को षड्भुज मूर्ति के रूप में दर्शाया गया है, जो भगवान रामचंद्र, भगवान कृष्ण और भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु का संयोजन है। षडभुज मूर्ति की पूजा करके मानव जीवन का सर्वोत्तम उद्देश्य पूरा किया जा सकता है, जो कि भगवान का छह भुजाओं वाला रूप है - रामचंद्र की दो भुजाएँ, कृष्ण की दो भुजाएँ और श्री चैतन्य महाप्रभु की दो भुजाएँ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥