चूंकि भगवान हमेशा आध्यात्मिक रूप से योग्य हैं, इसलिए वे उन भक्तों के प्रति आसक्त हैं जो हमेशा उन्हें पारलौकिक प्रेमपूर्ण सेवा प्रदान करते हैं। वह जीवन में सत्य से जुड़े हैं, ब्राह्मणी गुणों से नहीं। वास्तव में, वह किसी भी भौतिक गुणों से कभी आसक्त नहीं होते। यद्यपि वह सभी जीवों की अंतरात्मा हैं, वह विशेष रूप से उन लोगों को प्रकट होते हैं जो आत्म-साक्षात्कारी हैं, और वह अपने ट्रान्सेंडैंटल भक्तों के दिलों को विशेष रूप से प्रिय हैं। क्योंकि भगवान रामचंद्र मानव समाज को सिखाने के लिए अवतरित हुए कि एक राजा को कितना कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए, इसलिए उन्होंने माता सीता और लक्ष्मण का साथ स्पष्ट रूप से छोड़ दिया। हालाँकि, वास्तव में, वह उन्हें छोड़ नहीं सकते थे। इसलिए हमें आत्म-साक्षात्कारी आत्मा से भगवान श्रीराम के कार्यों के बारे में जानना चाहिए। तब हम भगवान की ट्रान्सेंडैंटल गतिविधियों को समझ सकते हैं।
