भारत-भूमिते हइला मनुष्य-जनम यारा
जनम सार्थक करि करि पर-उपकारा
"भारतवर्ष में जो मनुष्य के रूप में जन्म लेता है, उसे अपने जीवन को सफल बना कर औरों के लाभ के लिए काम करना चाहिए।"
भारतवर्ष में भक्ति सेवा करने की बहुत सुविधाएँ हैं। भारतवर्ष में सभी आचार्यों ने अपना अनुभव दिया, और श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं भारतवर्ष के लोगों को आध्यात्मिक जीवन में कैसे तरक्की की जाए और भगवान की भक्ति सेवा में कैसे स्थिर हुआ जाए, यह सिखाने के लिए प्रकट हुए। सभी दृष्टिकोणों से, भारतवर्ष एक विशेष भूमि है जहाँ कोई बहुत आसानी से भक्ति सेवा की प्रक्रिया को समझ सकता है और अपने जीवन को सफल बनाने के लिए इसे अपना सकता है। यदि कोई अपने जीवन को भक्ति सेवा में सफल बनाता है और फिर दुनिया के अन्य हिस्सों में भक्ति सेवा का प्रचार करता है, तो वास्तव में दुनिया भर के लोगों को लाभ होगा।
