श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 19: जम्बूद्वीप का वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.19.21 
एतदेव हि देवा गायन्ति—
अहो अमीषां किमकारि शोभनं
प्रसन्न एषां स्विदुत स्वयं हरि: ।
यैर्जन्म लब्धं नृषु भारताजिरे
मुकुन्दसेवौपयिकं स्पृहा हि न: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
चूँकि आत्मसाक्षात्कार के लिए इन्सानी जीवन सर्वश्रेष्ठ स्थान है, इसलिए स्वर्गलोक के सभी देवता ऐसा कहते हैं—इन मनुष्यों का भारतवर्ष में जन्म लेना कितना विस्मयकारी है। उन्होंने पहले जन्म में अवश्य ही तप किया होगा या स्वयं श्रीभगवान् ही उनसे प्रसन्न हुए होंगे। अन्यथा वे ऐसे विभिन्न तरीकों से भक्ति कैसे कर सकते हैं? हम देवता सिर्फ भारतवर्ष में इन्सान का जन्म लेकर भक्ति करने की लालसा कर सकते हैं, मगर ये मनुष्य पहले से ही भक्ति में लगे हुए हैं।
 
Since human life is the ultimate stage for self-realization, all the demigods in heaven say, "How amazing it is for these human beings to be born in India. They must have performed some penance in the past or the Supreme Lord must have been pleased with them. Otherwise, how would they engage in devotion in this way? We demigods can only aspire to take human birth in India to perform devotion, but these human beings are already engaged in devotion."
तात्पर्य
ये तथ्य चैतन्य-चरितामृत में और अधिक समझाये गए हैं (आदि 9.41):

भारत-भूमिते हइला मनुष्य-जनम यारा

जनम सार्थक करि करि पर-उपकारा

"भारतवर्ष में जो मनुष्य के रूप में जन्म लेता है, उसे अपने जीवन को सफल बना कर औरों के लाभ के लिए काम करना चाहिए।"

भारतवर्ष में भक्ति सेवा करने की बहुत सुविधाएँ हैं। भारतवर्ष में सभी आचार्यों ने अपना अनुभव दिया, और श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं भारतवर्ष के लोगों को आध्यात्मिक जीवन में कैसे तरक्की की जाए और भगवान की भक्ति सेवा में कैसे स्थिर हुआ जाए, यह सिखाने के लिए प्रकट हुए। सभी दृष्टिकोणों से, भारतवर्ष एक विशेष भूमि है जहाँ कोई बहुत आसानी से भक्ति सेवा की प्रक्रिया को समझ सकता है और अपने जीवन को सफल बनाने के लिए इसे अपना सकता है। यदि कोई अपने जीवन को भक्ति सेवा में सफल बनाता है और फिर दुनिया के अन्य हिस्सों में भक्ति सेवा का प्रचार करता है, तो वास्तव में दुनिया भर के लोगों को लाभ होगा।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)