Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.19.11: मैं समस्त संत पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ श्रीभगवान् नर-नारायण को सादर नमन करता हूँ। वे अत्यधिक आत्मसंयमित और आत्मनिर्भर हैं। वे व्यर्थ के अभिमान से सर्वथा रहित हैं, और वे निर्धनों की एकमात्र संपत्ति हैं। मनुष्यों में सर्वोच्च रूप से सम्माननीय परमहंसों के वे गुरु हैं और आत्मसिद्ध जनों के स्वामी हैं। मैं उनके चरणकमलों को बार-बार नमन करता हूँ। | bhagavat अध्याय 5.19: जम्बूद्वीप का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं समस्त संत पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ श्रीभगवान् नर-नारायण को सादर नमन करता हूँ। वे अत्यधिक आत्मसंयमित और आत्मनिर्भर हैं। वे व्यर्थ के अभिमान से सर्वथा रहित हैं, और वे निर्धनों की एकमात्र संपत्ति हैं। मनुष्यों में सर्वोच्च रूप से सम्माननीय परमहंसों के वे गुरु हैं और आत्मसिद्ध जनों के स्वामी हैं। मैं उनके चरणकमलों को बार-बार नमन करता हूँ।
I offer my respectful obeisances unto Sri Bhagavan Nara-Narayana, the best of all saints. He is supremely self-controlled and self-indulgent, he is beyond false prestige and is the only wealth of the poor. He is the most honourable of men, the Guru of all Paramhansas and the master of the self-realised. I offer my obeisances again and again unto his lotus feet.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥