काठ में छिपी हुई आग को अरणी से उत्पन्न कर सकने में ऋषि और मुनि सक्षम हैं। हे प्रभु, परमसत्य को समझने में निपुण ऐसे व्यक्ति आपको हर चीज में, यहाँ तक कि अपने शरीर में भी देखने का प्रयास करते हैं, लेकिन फिर भी आप अप्रकट रहते हैं। मानसिक या शारीरिक क्रियाओं जैसी अप्रत्यक्ष विधियों से आपको नहीं समझा जा सकता है। आप स्वयं-प्रकट होने वाले हैं, इसलिए जब आप देखते हैं कि कोई व्यक्ति पूरे दिल से आपकी खोज में लगा है, तभी आप स्वयं को प्रकट करते हैं। इसलिए मैं आपको अपना विनम्र प्रणाम करता हूँ।
Rishis and sages are able to produce fire hidden in wood by means of arani. O Lord, such persons who are adept in understanding the Supreme Truth try to see You in everything, even in their own bodies, but You still remain unmanifested. You cannot be understood by indirect methods such as mental or physical actions. You are self-manifesting, so You reveal Yourself only when You see that a person is wholeheartedly engaged in Your search. Therefore, I offer my respectful obeisances unto You.
तात्पर्य
अर्थ शब्द का अर्थ है, "देवताओं को सन्तुष्ट करने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न करके।" विपश्चितः शब्द की व्याख्या तैत्तिरीय उपनिषद में इस प्रकार की गई है: सत्यं ज्ञानम अनन्तं ब्रह्म; यो वेद निहितं गुहायां परमे व्योमन; सोऽश्नुते सर्वान कामान सह ब्रह्मणा विपश्चितिति। जैसा कि कृष्ण ने भगवद् गीता (७.१९) में कहा है, बहुनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान् माम् प्रपद्यते: "अनेक जन्मों और मृत्युओं के बाद, जो वास्तव में ज्ञानवान है, वह मुझे समर्पण करता है।" जब कोई समझ जाता है कि ईश्वर सभी के हृदय में स्थित है और वास्तव में ईश्वर को हर जगह देखता है, तो उसे पूर्ण ज्ञान होता है। शब्द जात-वेद का अर्थ है "अग्नि जो लकड़ी रगड़ने से उत्पन्न होती है।" वैदिक काल में, विद्वान ऋषि लकड़ी से अग्नि उत्पन्न कर सकते थे। जात-वेद भी पेट में आग को इंगित करता है, जो खाने-पीने की सभी चीजों को पचाता है और जिससे भूख पैदा होती है। शब्द गुढ़ की व्याख्या श्वेताश्वत उपनिषद में की गई है। एको देवः सर्व-भूतेषु गुढ़ः: सर्वोच्च ईश्वर व्यक्तित्व को वैदिक मंत्रों का जाप करके समझा जाता है। सर्व-व्यापी सर्व-भूतांतर-आत्मा: वे सर्व-व्यापी हैं, और वे जीवित संस्थाओं के हृदय में हैं। कर्माध्यक्षः सर्व-भूताधिवासः: वे जीवित इकाई की सभी गतिविधियों के साक्षी हैं। साक्षी चेत केवलो निर्गुणश्च: सर्वोच्च ईश्वर साक्षी के साथ-साथ जीवित शक्ति भी है, फिर भी वे सभी भौतिक गुणों से परे हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥