यं लोकपाला: किल मत्सरज्वरा
हित्वा यतन्तोऽपि पृथक्समेत्य च ।
पातुं न शेकुर्द्विपदश्चतुष्पद:
सरीसृपं स्थाणु यदत्र दृश्यते ॥ २७ ॥
अनुवाद
हे प्रभु, ब्रह्मा तथा अन्य देवताओं जैसे इस ब्रह्माण्ड के श्रेष्ठतम नेताओं से लेकर इस संसार के राजनीतिक नेताओं तक, सभी आपकी सत्ता के ईर्ष्यालु हैं। किन्तु आपकी सहायता के बिना वे न तो पृथक् रूप से और न ही एक साथ मिलकर इस ब्रह्माण्ड के असंख्य जीवों का पालन पोषण कर सकते हैं। आप समस्त मनुष्यों, पशुओं (जैसे गायें और गधे), वनस्पतियों, रेंगने वाले जीवों, पक्षियों, पर्वतों और इस भौतिक संसार में दृष्टिगोचर होने वाली हर एक चीज़ के एकमात्र यथार्थ पालनकर्ता हैं।
O Lord, the greatest leaders of this universe, from Brahma and other demigods to the political leaders of this world, are all jealous of Your power. But without Your help they cannot maintain the innumerable living entities of this universe either separately or collectively. You are the only real maintainer of all human beings, animals (like cows, donkeys) and all vegetation, reptiles, birds, mountains and whatever is visible in this world.
तात्पर्य
वस्तुवादी व्यक्तियों के लिए ईश्वर की शक्ति से मुक़ाबला करना फैशन बन गया है। जब कथित वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशालाओं में जीवित इकाइयों को बनाने की कोशिश करते हैं, तो उनका एकमात्र उद्देश्य परमेश्वर की प्रतिभा और क्षमता को चुनौती देना है। इसे भ्रम कहा जाता है। यह उच्च ग्रह तंत्रों में भी मौजूद है, जहाँ भगवान ब्रह्मा, भगवान शिव और अन्य जैसे महान देवता निवास करते हैं। इस दुनिया में हर कोई अपने सभी प्रयासों की असफलता के बावजूद झूठी प्रतिष्ठा से भरा हुआ है। जब कथित परोपकारी, जो माना जाता है कि गरीबों की मदद करना चाहते हैं, तो कृष्ण चेतना आंदोलन के सदस्यों से संपर्क किया जाता है, तो वे कहते हैं, "जबकि मैं भूखे लोगों के विशाल जनसमूह को भोजन खिला रहा हूं, आप अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।" दुर्भाग्य से, उनके छोटे-छोटे प्रयास, चाहे अकेले हों या एक साथ, किसी की समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं। कभी-कभी कथित स्वामी गरीब लोगों को खिलाने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं, उन्हें दारिद्र-नारायण, भगवान के अवतार के रूप में मानते हैं। वे मूल, सर्वोच्च नारायण की तुलना में निर्मित दारिद्र-नारायण की सेवा करना पसंद करते हैं। वे कहते हैं, "भगवान नारायण की सेवा को प्रोत्साहित मत करो। दुनिया के भूखे लोगों की सेवा करना बेहतर है।" दुर्भाग्य से ऐसे भौतिकवादी, चाहे अकेले या संयुक्त राष्ट्र के रूप में संयुक्त रूप से, अपनी योजनाओं को पूरा नहीं कर सकते। सच्चाई यह है कि कई लाखों मनुष्य, जानवर, पक्षी और पेड़ - वास्तव में, सभी जीवित संस्थाओं - को केवल सर्वोच्च व्यक्तित्व भगवान द्वारा बनाए रखा जाता है। एको बहुनां यो विदधाति कामन: एक व्यक्ति, सर्वोच्च प्रभु, अन्य सभी जीवित संस्थाओं के लिए जीवन की आवश्यकताएं प्रदान कर रहे हैं। सर्वोच्च देवता नारायण के अधिकार को चुनौती देना असुरों (दानवों) का व्यवसाय है। फिर भी कभी-कभी सुर, या भक्त, भी मायावी ऊर्जा से भ्रमित हो जाते हैं और झूठे तौर पर पूरे ब्रह्मांड के संधारक होने का दावा करते हैं। ऐसी घटनाओं का वर्णन श्रीमद्-भागवतम के दसवें कांड में किया गया है, जहाँ शुकदेव गोस्वामी बताते हैं कि कैसे भगवान ब्रह्मा और राजा इंद्र अभिमानी हो गए और अंततः कृष्ण द्वारा दंडित किए गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥