Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.18.24: शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा - रम्यकवर्ष में पिछले मन्वन्तर (चाक्षुष) के अंत में भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण किया था। इस क्षेत्र के अधिपति वैवस्वत मनु हैं। वे आज भी मत्स्य भगवान की शुद्ध भक्ति करते हैं और निम्न मंत्र का जप करते हैं। | bhagavat अध्याय 5.18: जम्बूद्वीप के निवासियों द्वारा भगवान् की स्तुति । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रम्यके च भगवत: प्रियतमं मात्स्यमवताररूपं तद्वर्षपुरुषस्य मनो: प्राक्प्रदर्शितं स इदानीमपि महता भक्तियोगेनाराधयतीदं चोदाहरति ॥ २४ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा - रम्यकवर्ष में पिछले मन्वन्तर (चाक्षुष) के अंत में भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण किया था। इस क्षेत्र के अधिपति वैवस्वत मनु हैं। वे आज भी मत्स्य भगवान की शुद्ध भक्ति करते हैं और निम्न मंत्र का जप करते हैं।
Sukadeva Goswami further says—At the end of the last Manvantara (Chakshusha) in Ramyakavarsha, Sri Bhagavan appeared in the form of Matsya, where the ruler is Vaivasvat Manu. Even today he does pure devotion to Lord Matsya and chants the following mantra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥