भगवान कृष्ण ने स्वयं भगवद गीता (18.66) में कहा है, अहं त्वां सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यामि: "मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा।" कृष्ण किसी से नहीं डरते। इसके विपरीत, हर कोई कृष्ण से डरता है। इसलिए वह वास्तव में एक अधीनस्थ प्राणी को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। चूंकि तथाकथित नेता या तानाशाह पूरी तरह से भौतिक प्रकृति के नियंत्रण में होते हैं, इसलिए वे कभी भी दूसरों को पूर्ण सुरक्षा नहीं दे सकते, यद्यपि वे झूठी प्रतिष्ठा के कारण यह क्षमता का दावा करते हैं। न ते विदुः स्वार्थ गतं हि विष्णु: लोग यह नहीं जानते हैं कि जीवन में वास्तविक उन्नति में भगवान को अपने स्वामी के रूप में स्वीकार करना शामिल है। सर्वशक्तिमान होने का दिखावा करके खुद को और दूसरों को धोखा देने की बजाय, सभी राजनीतिक नेताओं, पतियों और अभिभावकों को कृष्ण चैतन्य आंदोलन का प्रसार करना चाहिए ताकि हर कोई यह सीख सके कि सर्वोच्च पति कृष्ण को कैसे समर्पण करना है।
