केतुमालेऽपि भगवान् कामदेवस्वरूपेण लक्ष्म्या: प्रियचिकीर्षया प्रजापतेर्दुहितृणां पुत्राणां तद्वर्षपतीनां पुरुषायुषाहोरात्रपरिसङ्ख्यानानां यासां गर्भा महापुरुषमहास्त्रतेजसोद्वेजितमनसां विध्वस्ता व्यसव: संवत्सरान्ते विनिपतन्ति ॥ १५ ॥
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा - केतुमालवर्ष नामक भूमि के क्षेत्र में भगवान विष्णु अपने भक्तों के संतोष के लिए कामदेव के रूप में रहते हैं। इन भक्तों में लक्ष्मीजी, प्रजापति संवत्सर और संवत्सर के सभी पुत्र और पुत्रियाँ शामिल हैं। प्रजापति की पुत्रियों को रात का और उनके पुत्रों को दिन का नियामक देवता माना जाता है। प्रजापति की सन्तानों की संख्या 36,000 है जो मनुष्य के जीवनकाल के प्रत्येक दिन और रात की संख्या के बराबर है। हर साल के अंत में प्रजापति की पुत्रियाँ श्री भगवान के चक्र को देखकर बहुत उद्वेलित हो जाती हैं और इससे उन सभी का गर्भपात हो जाता है।
Shukdev Goswami further said—In the land called Ketumalvarsha, Lord Vishnu lives in the form of Kamadeva for the satisfaction of his devotees. These devotees include Lakshmiji, Prajapati Samvatsar and all the sons and daughters of Samvatsar. Prajapati's daughters are considered the ruling deities of the night and his sons are considered the ruling deities of the day. The number of Prajapati's children is 36,000 which is equal to the number of each day and night of a human's life. At the end of each year, Prajapati's daughters become very agitated on seeing Shri Bhagwan's Chakra, due to which all of them have abortions.
तात्पर्य
यह कामदेव, जो कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में प्रकट होता है, विष्णु-तत्त्व है। यह कैसा है यह माध्वाचार्य द्वारा समझाया गया है, जो ब्रह्मांड पुराण से उद्धृत करते हैं: कामदेव-स्थितं विष्णुम उपास्ते। यद्यपि यह कामदेव विष्णु-तत्त्व है, परन्तु उसका शरीर आध्यात्मिक नहीं बल्कि भौतिक है। प्रद्युम्न या कामदेव के रूप में भगवान विष्णु एक भौतिक शरीर को स्वीकार करते हैं, परन्तु वह अभी भी आध्यात्मिक रूप से कार्य करते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह आध्यात्मिक या भौतिक शरीर को स्वीकार करते हैं, वह अस्तित्व की किसी भी स्थिति में आध्यात्मिक रूप से कार्य कर सकते हैं। मायावादी दार्शनिक भगवान कृष्ण के शरीर को भी भौतिक मानते हैं, परन्तु उनकी राय प्रभु की आध्यात्मिक गतिविधि में बाधा नहीं डाल सकती।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥