इसी प्रकार अलकनन्दा ब्रह्मपुरी की दक्षिण दिशा से बहती है। अलग-अलग क्षेत्रों के पर्वतों की चोटियों को पार करती हुई यह बहुत तेजी से हेमकूट और हिमकूट पर्वतों की चोटियों पर गिरती है। इन पर्वतों की चोटियों को डुबोती हुई गंगा भारतवर्ष नाम के क्षेत्र में गिरती है और उसे अपने पानी से भरती रहती है। इसके बाद यह दक्षिण दिशा में जाकर नमकीन पानी के सागर से मिल जाती है। जो लोग इस नदी में स्नान करने आते हैं, वे भाग्यशाली होते हैं। उन्हें कदम-कदम पर राजसूय और अश्वमेध जैसे महान यज्ञ करने का फल पाना मुश्किल नहीं है।
Similarly, Alaknanda flows from the south of Brahmapuri. Crossing the peaks of mountains in different regions, it falls with great speed on the peaks of Hemkut and Himkut mountains. Flooding the peaks of these mountains, Ganga falls in the land called Bharatvarsh and keeps filling it with its water. After that it merges with the Lavan Sagar in the south. Those people who come to take bath in this river are fortunate. It is not difficult for them to get the fruits of performing great yagyas like Rajsuya and Ashvamedha at every step.
तात्पर्य
जहाँ गंगा का पानी बंगाल की खाड़ी के नमकीन पानी से मिलता है, इस स्थान को अभी भी गंगा सागर के रूप में जाना जाता है, या गंगा और बंगाल की खाड़ी का मिलन स्थल। जनवरी-फरवरी में मकर-संक्रांति के दिन, आज भी हजारों लोग स्नान करने वहाँ जाते हैं, मुक्ति की आशा में। इस तरह से उन्हें वास्तव में मुक्ति मिल सकती है इसकी पुष्टि यहाँ की गई है। जो लोग गंगा में किसी भी समय स्नान करते हैं, उनके लिए अश्वमेघ और राजसूय यज्ञ जैसे महान यज्ञों के नतीजे हासिल करना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। भारत में अधिकांश लोग अभी भी गंगा में स्नान करने के इच्छुक हैं, और ऐसे बहुत से स्थान हैं जहाँ वे ऐसा कर सकते हैं। प्रयाग (इलाहाबाद) में, जनवरी के महीने में हजारों लोग गंगा और यमुना के संगम में स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं। इसके बाद, उनमें से कई लोग स्नान करने के लिए बंगाल की खाड़ी और गंगा के संगम पर जाते हैं। इस प्रकार यह भारत के सभी लोगों के लिए एक विशेष सुविधा है कि वे तीर्थ के इतने सारे स्थानों पर गंगा के पानी में स्नान कर सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥