श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 17: गंगा-अवतरण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.17.4 
ततोऽनेकसहस्रकोटिविमानानीकसङ्कुलदेवयानेनावतरन्तीन्दुमण्डलमावार्य ब्रह्मसदने निपतति ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
ध्रुवलोक के आस-पास के सातों लोक को शुद्ध करने के उपरांत, गंगा का जल करोड़ों देवताओं के विमानों से अंतरिक्ष में ले जाया जाता है। इसके बाद यह चंद्रलोक तक पहुँचता है और बहते हुए मेरु पर्वत पर स्थित ब्रह्मा के निवास स्थान तक पहुँच जाता है।
 
After purifying the seven worlds neighbouring Dhruvalok, the water of Ganga is carried to space by the aircrafts of millions of gods. Then it floods Chandralok and finally reaches the abode of Brahma situated on Mount Meru.
तात्पर्य
हिंदी -पाठ : हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि गंगा नदी विराट सागर से उत्पन्न होती है, जो ब्रह्मांड को ढकने के परे है। भगवान वामनदेव द्वारा बनाए गए छेद से विराट सागर का पानी रिसने के बाद, यह ध्रुवलोक (ध्रुव तारे) तक बहता है और फिर ध्रुवलोक के नीचे के सात ग्रहों तक जाता है। फिर इसे असंख्य दिव्य हवाई जहाजों द्वारा चंद्रमा तक ले जाया जाता है, और फिर यह सुमेरू पर्वत के शीर्ष पर गिरता है, जिसे सुमेरु-पर्वत के रूप में जाना जाता है। इस तरह, गंगा का पानी अंततः निम्न ग्रहों और हिमालय की चोटियों तक पहुँचता है, और वहाँ से यह हरिद्वार और पूरे भारत के मैदानों से होकर बहता है, जिससे पूरी भूमि शुद्ध हो जाती है। ब्रह्मांड के शीर्ष से गंगा जल विभिन्न ग्रहों तक कैसे पहुँचता है, यह यहाँ बताया गया है। दिव्य हवाई जहाज ऋषियों के ग्रहों से पानी को अन्य ग्रहों तक ले जाते हैं। आधुनिक युग के तथाकथित उन्नत वैज्ञानिक उच्च ग्रहों पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन साथ ही वे पृथ्वी पर बिजली की कमी का भी सामना कर रहे हैं। यदि वे वास्तव में सक्षम वैज्ञानिक होते, तो वे व्यक्तिगत रूप से हवाई जहाज से अन्य ग्रहों तक जा सकते थे, लेकिन ऐसा करने में वे असमर्थ हैं। अब चंद्रमा की यात्राओं को त्यागने के बाद, वे अन्य ग्रहों पर जाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन असफल हो रहे हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)