वाराहे वाम-पादं तु
तद-anyeṣu tu dakṣiṇam
पादं kalpeṣu bhagavān
ujjahāra trivikramaḥ
अपने दाहिने पैर पर खड़े होकर और अपने बाएँ पैर को ब्रह्माण्ड के छोर तक फैलाकर, भगवान वामन को त्रिविक्रम के रूप में जाना जाने लगा, वह अवतार जिसने तीन वीरतापूर्ण कार्य किये थे।
