यथा भगवते तुक्तम्
भौवनं कोश-लक्षणम्
तस्यविरोधतो योज्यम्
अन्य-ग्रन्थन्तरे स्थितम्
मांडोदे पुराणं चैव
व्यत्यासं क्षीर-सागरे
राहु-सोम-रवीणां च
मंडलाद् द्वि-गुणोक्तितम्
विनैव सर्वम् उन्नीयम्
योजनभेदतोऽत्र तु
इन श्लोकों से प्रतीत होता है कि सूर्य और चंद्रमा के अलावा राहु नामक एक अदृश्य ग्रह भी है। राहु की गति सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहणों का कारण बनती है। हमारा सुझाव है कि चंद्रमा तक पहुंचने का प्रयास करने वाले आधुनिक अभियान गलती से राहु की ओर जा रहे हैं।
