अद्वैतम् अच्युतम् अनादि अनन्त-रूपम्
आद्यम् पूरण-पुरुषम् नव-यौवनम् च
भगवान की विस्तार की सीमाओं का अनुमान कोई भी नहीं लगा सकता है, यहाँ तक कि ब्रह्मा जैसे परिपूर्ण व्यक्ति भी नहीं, उन छोटे वैज्ञानिकों की तो बात ही छोड़िए जिनकी इंद्रियाँ और उपकरण सभी अपूर्ण हैं और जो हमें इस एक ब्रह्मांड की भी जानकारी नहीं दे सकते हैं। इसलिए हमें वैदिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी से संतुष्ट होना चाहिए जैसा कि शुकादेव गोस्वामी जैसे अधिकारियों द्वारा बताया गया है।
