सुपार्श्व पर्वत के किनारे महाकदम्ब नाम का बहुत ही प्रसिद्ध एवं विशाल वृक्ष खड़ा है। इस वृक्ष के थोबे से मधु की पाँच नदियाँ निकलती हैं जिनमें से प्रत्येक लगभग पाँच व्याम चौड़ी है। यह प्रवाहमान मधु सुपार्श्व पर्वत की चोटी से निरंतर नीचे गिरता रहता है और इलावृत् वर्ष की पश्चिमी दिशा से प्रारंभ होकर उसके चारों ओर बहता रहता है। इस प्रकार सारा क्षेत्र सुहावनी गंध से भर जाता है।
Next to the Suparsva mountain stands a very famous giant tree called Mahakadamba. Five rivers of honey emerge from the cavity of this tree, each of which is about five “vyam” wide. This flowing honey keeps falling down from the peak of the Suparsva mountain and starts from the west side of Ilavrita-varsa and keeps flowing around it. Thus the entire place is filled with pleasant smell.
तात्पर्य
जब कोई दोनों हाथ फैलाता है तो एक हाथ से दूसरे हाथ की दूरी को व्याम कहा जाता है। यह लगभग आठ फीट होती है। इस प्रकार प्रत्येक नदी लगभग चालीस फीट चौड़ी थी, जिससे कुल चौड़ाई लगभग दो सौ फीट हो जाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥