Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 5.16.18: यक्षों की पतिव्रता पत्नियाँ भगवान शिव की पत्नी भवानी की नौकरानियों की तरह उनकी सेवा करती हैं। अरुणोदा नदी के पानी को पीने से उनके शरीर सुगंधित हो जाते हैं। हवा जब उनके शरीर को छूती है, तो उस सुगंध के कारण आसपास का पूरा माहौल 80 मील तक महक उठता है। | bhagavat अध्याय 5.16: जम्बूद्वीप का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदुपजोषणाद्भवान्या अनुचरीणां पुण्यजनवधूनामवयवस्पर्शसुगन्धवातो दशयोजनं समन्तादनुवासयति ॥ १८ ॥
अनुवाद
यक्षों की पतिव्रता पत्नियाँ भगवान शिव की पत्नी भवानी की नौकरानियों की तरह उनकी सेवा करती हैं। अरुणोदा नदी के पानी को पीने से उनके शरीर सुगंधित हो जाते हैं। हवा जब उनके शरीर को छूती है, तो उस सुगंध के कारण आसपास का पूरा माहौल 80 मील तक महक उठता है।
The holy wives of the Yakshas are the attendants of Bhawani, the better half of Lord Shiva. Their bodies become fragrant due to drinking the water of the Arunoda river. The air touching their bodies perfumes the entire atmosphere up to a radius of eighty miles with that fragrance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥