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bhagavat 5.16.17: जब इतनी ऊंचाई से ठोस आम्रफल गिरते हैं, तो वे फट जाते हैं और उनका मीठा, सुगंधित रस बाहर निकल आता है। यह रस अन्य महक के साथ मिलकर और भी अधिक सुगंधित हो जाता है। यही रस पर्वत से झरनों के रूप में बहता है और अरुणोदा नामक नदी का रूप ले लेता है, जो इलावृत के पूर्वी हिस्से से बहती है।   |   bhagavat अध्याय 5.16: जम्बूद्वीप का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 16: जम्बूद्वीप का वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.16.17 
तेषां विशीर्यमाणानामतिमधुरसुरभिसुगन्धि बहुलारुणरसोदेनारुणोदा नाम नदी मन्दरगिरिशिखरान्निपतन्ती पूर्वेणेलावृतमुपप्लावयति ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
जब इतनी ऊंचाई से ठोस आम्रफल गिरते हैं, तो वे फट जाते हैं और उनका मीठा, सुगंधित रस बाहर निकल आता है। यह रस अन्य महक के साथ मिलकर और भी अधिक सुगंधित हो जाता है। यही रस पर्वत से झरनों के रूप में बहता है और अरुणोदा नामक नदी का रूप ले लेता है, जो इलावृत के पूर्वी हिस्से से बहती है।
 
Due to falling from such a height, all those mango fruits burst and their sweet, fragrant juice comes out. This juice gets mixed with other fragrances and becomes extremely fragrant. This juice goes into the waterfalls from the mountain and takes the form of a river named Arunoda which flows through the eastern side of Ilavrita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)