श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 15: राजा प्रियव्रत के वंशजों का यश-वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.15.6 
भूम्न ऋषिकुल्यायामुद्गीथस्तत: प्रस्तावो देवकुल्यायां प्रस्तावान्नियुत्सायां हृदयज आसीद्विभुर्विभो रत्यां च पृथुषेणस्तस्मान्नक्त आकूत्यां जज्ञे नक्ताद्‍द्रुतिपुत्रो गयो राजर्षिप्रवर उदारश्रवा अजायत साक्षाद्भ‍गवतो विष्णोर्जगद्रिरक्षिषया गृहीतसत्त्वस्य कलाऽऽत्मवत्त्वादिलक्षणेन महापुरुषतां प्राप्त: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
राजा भूमा के पुत्र उद्गीथ की पत्नी देवकुल्या ने प्रस्ताव नामक पुत्र को जन्म दिया। प्रस्ताव और उनकी पत्नी नियुत्सा के पुत्र विभु हुए। विभु की पत्नी रती के गर्भ से पृथुशेण का जन्म हुआ। पृथुशेण की पत्नी आकूति के गर्भ से नक्त नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। नक्त की पत्नी द्रुति ने महान राजा गय को जन्म दिया। गय बहुत प्रसिद्ध और पवित्र थे, वे राजर्षियों में सर्वश्रेष्ठ थे। भगवान विष्णु और उनके अवतार, जो ब्रह्मांड की रक्षा के लिए हैं, वे हमेशा विशुद्ध सत्त्व नामक दिव्य अच्छाई के गुण में रहते हैं। भगवान विष्णु के प्रत्यक्ष अवतार होने के कारण, राजा गय भी विशुद्ध सत्त्व में थे। इस कारण, महाराजा गय दिव्य ज्ञान से पूर्ण थे। इसलिए उन्हें महापुरुष कहा जाता था।
 
From the womb of King Bhuma's wife Rishikulya a son named Udgitha was born. From Udgitha's wife Devakulya a son named Prashakta was born and from his wife Niyutsa a son named Vibhu was born. From Vibhu's wife Rati a son named Prithusena was born and from Prithusena's wife Akuti a son named Nakta was born. Nakta's wife was Druti from whose womb a great king named Gaya was born. Gaya was very famous and pious, he was the best of the kings. Lord Vishnu and all His aspects are for the protection of the world and they always exist in the divine Sattva Guna, which is called Vishuddha Sattva. Being the direct part of Lord Vishnu, King Gaya was also situated in Vishuddha-Sattva. Therefore Maharaja Gaya was endowed with divine knowledge and hence he was called a great man.
तात्पर्य
इस छंद से यह पता चलता है कि भगवान के अवतार विभिन्न प्रकार के हैं। कुछ प्रत्यक्ष विस्तार के भाग और पार्सल हैं, और कुछ भगवान विष्णु के प्रत्यक्ष विस्तार हैं। भगवान के व्यक्तित्व का प्रत्यक्ष अवतार अंस या स्वांस कहलाता हैं, जबकि अंस से अवतार को कला कहा जाता हैं। कलाओं में विभिन्न अंश जीव या जीवित प्राणी होते हैं। इन्हें जीव तत्वों में गिना जाता है। जो सीधे भगवान विष्णु से आते हैं उन्हें विष्णु तत्व कहा जाता है और कभी कभी उन्हें महापुरुष के रूप में भी जाना जाता है। कृष्ण का एक अन्य नाम महापुरुष है, और एक भक्त को कभी कभी महा पुरुषिका कहा जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)