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bhagavat 5.15.14-15: गयन्ती के गर्भ से महाराज गय को चित्ररथ, सुगति और अवरोधन नाम के तीन पुत्र प्राप्त हुए। चित्ररथ की पत्नी ऊर्णा के गर्भ से सम्राट नाम का एक पुत्र हुआ। सम्राट की पत्नी उत्कला के गर्भ से मरीचि नाम का पुत्र हुआ। मरीचि की पत्नी बिन्दुमति ने बिन्दु नामक पुत्र को जन्म दिया। बिन्दु और उनकी पत्नी सरघा के गर्भ से मधु नाम का पुत्र हुआ। मधु की पत्नी सुमना ने एक पुत्र वीरव्रता को जन्म दिया और वीरव्रता की पत्नी भोजा ने मन्थु और प्रमन्थु नाम के दो पुत्रों को जन्म दिया। मन्थु की पत्नी सत्या को भौवन नाम का पुत्र हुआ और भौवन की पत्नी दूषणा ने त्वष्टा नाम के पुत्र को जन्म दिया। त्वष्टा की पत्नी विरोचना के गर्भ से विरज नाम का पुत्र हुआ और उनकी पत्नी विषूची ने एक सौ पुत्रों और एक पुत्री को जन्म दिया। इन सभी पुत्रों में शतजित नाम का पुत्र सबसे प्रमुख था।   |   bhagavat अध्याय 5.15: राजा प्रियव्रत के वंशजों का यश-वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 15: राजा प्रियव्रत के वंशजों का यश-वर्णन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  5.15.14-15 
गयाद्गयन्त्यां चित्ररथ: सुगतिरवरोधन इति त्रय: पुत्रा बभूवुश्चित्ररथादूर्णायां सम्राडजनिष्ट तत उत्कलायां मरीचिर्मरीचे ॥ १४ ॥
र्बिन्दुमत्यां बिन्दुमानुदपद्यत तस्मात्सरघायां मधुर्नामाभवन्मधो: सुमनसि वीरव्रतस्ततो भोजायां मन्थुप्रमन्थू जज्ञाते मन्थो: सत्यायां भौवनस्ततो दूषणायां त्वष्टाजनिष्ट त्वष्टुर्विरोचनायां विरजो विरजस्य शतजित्प्रवरं पुत्रशतं कन्या च विषूच्यां किल जातम् ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
गयन्ती के गर्भ से महाराज गय को चित्ररथ, सुगति और अवरोधन नाम के तीन पुत्र प्राप्त हुए। चित्ररथ की पत्नी ऊर्णा के गर्भ से सम्राट नाम का एक पुत्र हुआ। सम्राट की पत्नी उत्कला के गर्भ से मरीचि नाम का पुत्र हुआ। मरीचि की पत्नी बिन्दुमति ने बिन्दु नामक पुत्र को जन्म दिया। बिन्दु और उनकी पत्नी सरघा के गर्भ से मधु नाम का पुत्र हुआ। मधु की पत्नी सुमना ने एक पुत्र वीरव्रता को जन्म दिया और वीरव्रता की पत्नी भोजा ने मन्थु और प्रमन्थु नाम के दो पुत्रों को जन्म दिया। मन्थु की पत्नी सत्या को भौवन नाम का पुत्र हुआ और भौवन की पत्नी दूषणा ने त्वष्टा नाम के पुत्र को जन्म दिया। त्वष्टा की पत्नी विरोचना के गर्भ से विरज नाम का पुत्र हुआ और उनकी पत्नी विषूची ने एक सौ पुत्रों और एक पुत्री को जन्म दिया। इन सभी पुत्रों में शतजित नाम का पुत्र सबसे प्रमुख था।
 
Maharaj Gaya had three sons from Gayanti's womb whose names were Chitrarath, Sugati and Avrodhan. Chitrarath's wife Urna gave birth to a son named Samrat. Emperor's wife's name was Utkala from whose womb Emperor got a son named Marichi. Marichi's wife Bindumati gave birth to a son named Bindu. Bindu's wife Sargha gave birth to a son named Madhu. Madhu's wife Sumana gave birth to Veervrat and Veervrat's wife Bhoja gave birth to two sons named Manthu and Pramanthu. Manthu's wife Satya gave birth to a son named Bhauvan and Bhauvan's wife Dushana gave birth to a son named Tvashta. Tvashta's wife Virochana gave birth to a son named Viraj and his wife Vishuchi gave birth to one hundred sons and one daughter. Among all these sons, a son named Shatajit was the foremost.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)