श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 15: राजा प्रियव्रत के वंशजों का यश-वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.15.12 
यस्याध्वरे भगवानध्वरात्मामघोनि माद्यत्युरुसोमपीथे ।
श्रद्धाविशुद्धाचलभक्तियोग-समर्पितेज्याफलमाजहार ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
महाराज गय के यज्ञों में सोम नामक एक नशीली वस्तु का अत्यधिक प्रयोग होता था। राजा इंद्र इन यज्ञों में आते थे और इतनी मात्रा में सोमरस पीते थे कि वह मदमस्त हो जाते थे। भगवान विष्णु, जो कि यज्ञ-पुरुष हैं, भी इन यज्ञों में आते थे और यज्ञ में उन्हें समर्पित किए गए फल को स्वीकार करते थे।
 
Intoxicating substance called Soma was used extensively in the yagyas of Maharaj Gaya. King Indra used to come here and would become intoxicated by drinking copious amounts of Somras. Lord Shri Vishnu (Yagya Purusha) also used to come and personally accept the results of Yagya offered to him with pure devotion in the Yagya area.
तात्पर्य
महाराज गया इतने परिपूर्ण थे कि वे सभी देवताओं को संतुष्ट करते थे, जिनका नेतृत्व स्वर्गीय राजा इंद्र करते थे। साक्षात भगवान विष्णु भी स्वयं यज्ञशाला में उपहार स्वीकार करने आए थे। यद्यपि महाराज गया उन उपहारों को स्वीकार नहीं करना चाहते थे, लेकिन उनको सभी देवताओं और स्वयं भगवान के आशीर्वाद मिले।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)