श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 15: राजा प्रियव्रत के वंशजों का यश-वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.15.10 
यमभ्यषिञ्चन् परया मुदा सती:सत्याशिषो दक्षकन्या: सरिद्भ‍ि: ।
यस्य प्रजानां दुदुहे धराऽऽशिषोनिराशिषो गुणवत्सस्‍नुतोधा: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
महाराज दक्ष की श्रद्धा, मैत्री और दया जैसी सती और सच्ची बेटियाँ, जिनके आशीर्वाद हमेशा फलदायक होते थे, ने महाराज गय को पवित्र जल से स्नान कराया। वास्तव में, वे सभी महाराज गय से बहुत संतुष्ट थीं। पृथ्वी स्वयं ही गाय के रूप में प्रकट हुई और महाराज गय के अच्छे गुणों को देखकर दूध बहाने लगी, मानो गाय ने अपने बछड़े को देखा हो। दूसरे शब्दों में, महाराज गय पृथ्वी के सभी लाभों को प्राप्त करने में सक्षम थे और इस प्रकार अपने नागरिकों की इच्छाओं को पूरा करते थे। हालाँकि, उनकी स्वयं की कोई इच्छा नहीं थी।
 
Maharaja Daksh's faithful and truthful daughters like Shraddha, Maitri and Daya, whose blessings always bore fruit, used to anoint Maharaja Gaya with holy water. Actually, all of them were very satisfied with Maharaja Gaya. The earth herself appeared in the form of a cow and seeing Maharaja Gaya's excellent qualities, started to flow milk, as if a cow had seen her calf. The meaning is that Maharaja Gaya used to fulfill the desires of his subjects by taking advantage of all the resources of the earth. Yet he was selfless.
तात्पर्य
जिस धरती पर महाराज गय का शासन था, उसकी तुलना गाय से की जाती है। जिन अच्छे गुणों से वे जनता की देखभाल और शासन करते थे, उनकी तुलना उस गाय के बछड़े से की जाती है। एक गाय अपने बछड़े की मौजूदगी में दूध देती है; इसी तरह वह गाय या धरती, महाराज गय की इच्छाओं को पूरी करती थी, जो अपनी प्रजा को लाभ पहुँचाने के लिए धरती के सभी संसाधनों का उपयोग कर सकते थे। यह संभव था क्योंकि उन्हें दक्ष की ईमानदार बेटियों द्वारा पवित्र जल से स्नान कराया जाता था। जब तक राजा या शासक को अधिकारियों का आशीर्वाद नहीं मिलता, वह प्रजा पर बहुत संतोषजनक तरीके से शासन नहीं कर सकता। शासक के अच्छे गुणों के माध्यम से, नागरिक बहुत खुश और सुयोग्य बनते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)