आसुरीं योनिमापन्ना
मूढ़ा जन्मनि जन्मनः
माम प्राप्यैव कौन्तेय
ततो यान्त्य अधमां गतिम्
"राक्षसी जीवन की प्रजातियों के बीच बार-बार जन्म लेते हुए, ऐसे व्यक्ति कभी भी मुझ तक नहीं पहुंच सकते हैं। धीरे-धीरे वे सबसे घृणित प्रकार के अस्तित्व में डूब जाते हैं।"
भगवान का व्यक्तित्व किसी को भी भौतिक प्रकृति के कड़े कानूनों के खिलाफ काम करने की अनुमति नहीं देता है; इसलिए अवैध यौन संबंध जीवन भर दंडित किए जाते हैं। अवैध सेक्स गर्भधारण करता है, और ये अवांछित गर्भधारण गर्भपात की ओर ले जाते हैं। इसमें शामिल लोग इन पापों में फंस जाते हैं, इतना अधिक कि अगले जीवन में भी उन्हें उसी तरह दंडित किया जाता है। इस प्रकार अगले जन्म में भी वे माँ के गर्भ में प्रवेश करते हैं और उसी तरह मारे जाते हैं। इन सभी चीजों को कृष्ण भावना की पारलौकिक स्थिति में बने रहने से टाला जा सकता है। इस तरह से कोई पापपूर्ण गतिविधि नहीं करता है। वासनापूर्ण इच्छा के कारण अवैध यौन संबंध सबसे प्रमुख पाप है। जब कोई व्यक्ति जुनून के तरीके से जुड़ता है, तो वह जीवन के बाद जीवन में दुख में फंस जाता है।
