यथा ह्यनुवत्सरं कृष्यमाणमप्यदग्धबीजं क्षेत्रं पुनरेवावपनकाले गुल्मतृणवीरुद्भिर्गह्वरमिव भवत्येवमेव गृहाश्रम: कर्मक्षेत्रं यस्मिन्न हि कर्माण्युत्सीदन्ति यदयं कामकरण्ड एष आवसथ: ॥ ४ ॥
अनुवाद
कृषक अपने अनाज के खेत को हर साल जोतता रहता है और सभी खरपतवारों को उखाड़कर बाहर कर देता है। लेकिन, खरपतवारों के बीज ज़मीन में छिपे रह जाते हैं और पूरी तरह से नहीं जल पाते हैं। इस कारण, खेत में बोए गए पौधों के साथ ही खरपतवार भी उग आते हैं। चाहे खरपतवारों को कितनी भी बार जोतकर पलट दिया जाए, वे फिर से उग आते हैं। ठीक उसी तरह, गृहस्थ-आश्रम (परिवारिक जीवन) भी एक ऐसा कर्मक्षेत्र है। जब तक गृहस्थ-आश्रम में भोगने की इच्छा पूरी तरह से भस्म नहीं हो जाती, तब तक वह बार-बार उभरती रहती है। मान लीजिए कि किसी बर्तन से कपूर को हटा दिया जाता है, तब भी उस बर्तन में कपूर की सुगंध बनी रहती है। ठीक उसी तरह, जब तक इच्छाओं के बीजों को नष्ट नहीं किया जाता, तब तक सकाम कर्म (फल की इच्छा से किया गया कर्म) का नाश नहीं होता है।
Every year, the farmer ploughs his field and removes all the weeds, but even then their seeds remain in it and due to not being completely burnt, they grow again along with the plants sown in the field. Even after ploughing and turning the weeds, they grow again in a dense form. Similarly, the grihasthashram is a field of action. Until the desire to enjoy the grihasthashram is not completely destroyed, it keeps on rising again and again. Even if the camphor kept in the vessel is removed, its fragrance does not go away from the vessel. Similarly, until the seeds of desires are not destroyed, the sakaam karma is not destroyed.
तात्पर्य
जब तक किसी की इच्छाएँ पूर्ण रूप से भगवान के सेवा में हस्तांतरित नहीं हो जातीं, पारिवारिक जीवन की इच्छा बनी रहती है, भले ही किसी ने सन्यास ले लिया हो। कभी-कभी हमारे समाज, इस्कॉन में, कोई व्यक्ति भावना से सन्यास ले सकता है, लेकिन क्योंकि उसकी इच्छाएं पूरी तरह से नहीं जलती हैं, वह फिर से पारिवारिक जीवन में चला जाता है, यहां तक कि अपनी प्रतिष्ठा खोने और अपने अच्छे नाम को बदनाम करने के जोखिम पर भी। इन अत्यधिक इच्छाओं को पूरी तरह से जलाया जा सकता है जब कोई भक्ति सेवा में भगवान की सेवा में पूरी तरह से संलग्न हो जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥